धरती को स्वर्ग बनाऍंगे..

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…धरती को स्वर्ग बनाऍंगे..

आओ,आज हम नया गीत गाऍंगे।।ध्रृ।।

धरती माॅं के सपूत हैं हम
माॅं को खुश रखना चाहे हम
क्यों उदास है अपनी माता
आओ,हम सोचेंगे…
हम नया गीत गाऍंगे।..१

जंगल तोडा पेड कट गये
स्थान स्थान पर महल बन गये
पशु पंछी घर छोडचल दिए
नियम निसर्ग के नही तोडेंगे
आज हम नया गीत गायेंगे।..२

तालाब नदी के प्रवाह बदले
बाॅंध बॅंधारे टूट फूट ले
वर्षा गर्मी ऋतूही बदले
पर्यावरण के दौर हि बदले
-हास भूमी का कभी न करेंगे
हम नया गीत गायेंगे।..३

धरती को सुखी करना है तो
हरेभरे हो पर्वत, दोस्तो
पेडोकी कत्तल ना हो तो
धरती को स्वर्ग हम बनायेंगे
हम नया गीत गायेंगे।..४
प्रतिभा गारटकर
*** ‌‌. ***

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Bhavnagari
मी संपादक श्री.संतोष नारायण शिंदे बारामती इंदापूर भिगवन फलटण सातारा सांगली सह संपूर्ण महाराष्ट्र व विविध राज्यातून भारत देशातून दिल्ली मुंबई नागपूर गोवा विदर्भ पश्चिम महाराष्ट्र खानदेश उत्तर प्रदेश बंगाल विविध राज्यातून भावनगरी या वेबपेजच्या माध्यमातून सामाजिक, सार्वजनिक, सांस्कृतिक, क्रीडा, आरोग्यदायी, शेती, विविध विषयक जनहितार्थ वेब पेज पोर्टल वरती लोकहितार्थ बातमी, लेख जनोपयोगी प्रकारचे कथा-कथन कविता, सांस्कृतिक, क्रीडा विविध विषयावरती लेखन या भावनगरी वेब पेजच्या माध्यमातून जनहितार्थ प्रकाशित करत आहे...

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